प्रस्तावित ‘RCEP’ से राजस्व पर प्रभाव का आंकलन करे वाणिज्य मंत्रालय: एफएम
वित्त मंत्रालय ने वाणिज्य मंत्रालय को प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते आरसीईपी के राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने के लिए कहा है.
वाणिज्य विभाग को लिखे गए पत्र में राजस्व विभाग ने आरसीईपी से राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने के लिए अधिकारियों का संयुक्त दल गठित करने का भी सुझाव दिया है.
खबरों के मुताबिक राजस्व सचिव ने प्रस्तावित समझौते के राजस्व पर प्रभाव की गणना करने के लिए वाणिज्य सचिव को पत्र लिखा है.
क्षेत्रीय वृहद आर्थिक साझेदारी समझौते (आरसीईपी) पर साल 2013 से 16 देश बातचीत कर रहे हैं. समझौते पर मुख्य वार्ताकार अब तक 27 दौर की बातचीत कर चुके हैं.
माल और सेवा क्षेत्र दोनों मोर्चों पर अब भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं. आरसीईपी के समझौते के परवान चढ़ने से पहले इन्हें हल करने की जरूरत है. 16 सदस्यों वाले आरसीईपी ब्लाक ने इस साल नवंबर तक किसी नतीजे पर पहुंचने का लक्ष्य बना रखा है.
भारत के सामने भी कई चुनौतियां हैं. इनमें चीन जैसे सदस्य देशों के साथ व्यापार घाटे को कम करना और आयात शुल्क में कटौती या उसे हटाने से सीमा शुल्क से होने वाली आय में कमी शामिल हैं.
अगर 2018-19 में भारत को होने वाले व्यापार घाटे की बात करें तो आरसीईपी के सभी 16 देशों में से भारत 11 देशों के साथ भारत व्यापार घाटे में है. इनमें चीन, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं.
आरसीईपी के ब्लॉक में दस आसियान सदस्य (ब्रुनेई , कंबोडिया , इंडोनेशिया , लाओस , म्यामां , फिलिपीन , सिंगापुर , थाइलैंड और वियतनाम) और उनके छह मुक्त व्यापार भागीदार आस्ट्रेलिया , चीन , भारत , जापान , दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं.
इस समझौते में माल एवं सेवाएं, निवेश, आर्थिक और तकनीकी सहयोग, प्रतिस्पर्धा और बौद्धिक संपदा अधिकार शामिल हैं.
व्यापार क्षेत्र में सभी देश चाहते हैं कि भारत अपने बड़े बाजार को उनके लिए खोल दे. ये देश चाहते हैं कि भारत अधिकतम चीजों पर सीमा शुल्क कर दे. लेकिन देश का घरेलू उद्योग इसको लेकर चिंतित है. उसकी सबसे बड़ी चिंता इस समूह में चीन का शामिल होना भी है.
भारत 11,500 से अधिक उत्पादों का व्यापार करता है, इनमें से कई काफी संवेदनशील हैं. उदाहरण के लिए भारत का कृषि क्षेत्र जहां भारत अपने किसानों के हितों से खिलवाड़ नहीं चाहेगा.
आरसीईपी को लेकर जानकारों की राय मिलीजुली है. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर विश्वजीत धर कहते हैं कि मुक्त व्यापार समझौते का मतलब सिर्फ अपना बाजार खोलना नहीं है बल्कि दूसरों के बाजार तक पहुंच भी शामिल है.
भारत एक संतुलित व्यापार समझौता चाहता है. आरसीईपी विश्व की कुल 40 फीसदी जीडीपी को प्रभावित करेगा और इसमें दुनिया की 42 फीसदी जनसंख्या शामिल होगी.