सरकार ने शायद ही ये सोचा होगा कि जिस कानून के तहत सिर्फ मुस्लिम समाज को अलग-थलग और हाशिए पर डालने की कोशिश की जा रही है उसका इस पैमाने पर विरोध होगा.
शाहीन बाग में धरने पर बैठी महिलाओं और पुरुषों के चेहरों को देखकर समझदारी और वीरता का एहसास होता है.
मौजूद परिस्थितियों के बीच क्या लेबर पार्टी सरकार बनाने लायक सीटें ला पाएगी? इस पर दुनिया भर के प्रगतिशील लोगों की निगाहें टिकी हैं.
साफ पानी की जरूरत केवल निजी कंपनियों द्वारा पूरा किया जा सकता है, पानी के निजीकरण के लिए केंद्र सरकार और कुछ राज्य सरकारों की इच्छा को उजागर करता है.
विदेशी दवा कंपनियों के सामने एक और कारण है जिसके लिए वे भारतीय टीका बाजार में अपनी पैठ बनाना चाहते हैं.