किसान केवल राजनीतिक सत्ता भर नहीं बदलना चाहते हैं बल्कि किसानी की समस्या को भी दूर करना चाहते हैं.
बीजेपी के 15 सालों के शासन की कमियों को गिनाते हुए कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कई ऐसे वादे किए थे जिनका भरोसा कर जनता ने कांग्रेस का साथ दिया है.
आद्रे ट्रश्का ने अपनी किताब ‘कल्चर ऑफ एनकाउंटर्स : संस्कृत एट द मुग़ल कोर्ट’ में बताया है कि आखिर कैसे और क्यों मुग़लों ने संस्कृत के विद्वानों को अपने दरबार में प्रश्रय दिया.
झारखंड के लिट्टीपाड़ा और गोमिया से लेकर सिल्ली तक में हुए उपचुनावों में यह बात साबित हुई है कि उपचुनावों में मोदी मैजिक काम नहीं कर रहा.
आम चुनाव की पृष्ठभूमि में देखें तो इस बार बाबरी मस्जिद तोड़ने की तारीख का राजनीतिक महत्व पहले से कहीं अधिक व्यापक है.
हिंदू-मुस्लिम के बीच पैदा हुई विश्वास की खाई बाबरी मस्जिद विवाद से उस अंधेरी सुरंग में जा चुकी है जिसका कोई अंत नहीं दिखता.