भारत के लोग आजादी और प्रतिनिधित्व चाह रहे थे जबकि अंग्रेज शासक ऐसी किसी भी मांग को कुचल देना चाहते थे.
प्रधानमंत्री मोदी ने जेनेरिक दवा उपलब्ध कराने की बात की थी लेकिन दवा बाजार में सस्ती जेनेरिक दवा उपलब्ध करवाने के लिए कोई कदम नहीं उठाये गए हैं.
आने वाले समय में दुनिया में कॉरपोरेट घरानों के विरुद्ध जनता के बीच संघर्ष अटल है. जब तक लूट की व्यवस्था जारी है तब तक प्रेम और करुणा पूरे परिवर्तन के लिए केवल इंतजार नहीं कर सकती.
पिछले पांच साल में देश के कमजोर और वलनरेबल वर्ग इस शासन के निशाने पर हैं.
आरएसएस से जुड़े कई लोग, जो दरभंगा में कीर्ति आजाद के लिए काम कर चुके हैं, वे मान रहे हैं कि कीर्ति आजाद को हल्के में लेना जोखिम भरा काम हो सकता है.
बजट का 70 फीसदी हिस्सा केवल आधारभूत ढांचे को विकसित करने में ही खर्च किया जाएगा.