कैग की ये रिपार्ट खुलासा करती है कि राज्यों में दिखाई देने वाला विकास बुनियादी नहीं है.
भारत के बुद्धिजीवियों का जनता से सीधा संवाद कम है. इसे पुस्तक मेले के बहाने बहाल करना होगा.
इसके रोकथाम और उपचार पर होने वाले खर्च से अर्थव्यवस्था को अरबों का नुकसान पहुंचा है. कई डॉक्टर भी इसके चपेट में आ चुके हैं.
80 लोकसभा सीटों के साथ उत्तर प्रदेश केंद्र सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है. ऐसे में बीजेपी के भविष्य पर सवाल उठना लाजिमी है.
हाल ही में जालंधर में आयोजित विज्ञान कांग्रेस अतिरंजित और बेसिरपैर के दावे के लिए चर्चा में रही है.
कुंभ मेला क्षेत्र में ‘स्वच्छ भारत’ अभियान को आगे बढ़ाने का जिम्मा जिन लोगों के कंधों पर है उनकी हालत बदतर है.