विपक्षी गठबंधन की तमाम कमियों के बावजूद बीजेपी के लिए इस बार का चुनाव 2014 जैसा नहीं है.
मोदी के विरोध के नाम पर कहीं हम लोग इतने उतावले न हो जाएं कि लम्बे समय में बनाई गई लोकतांत्रिक परम्पराओं को ख़ुद ही ताख पर रखने लगें.
सवाल यह है कि आखिर लोहिया को अपने पाले में दिखाने की जरूरत मोदी को इस वक्त क्यों महसूस हुई, जब आम चुनाव चल रहे हैं.
मधु लिमये वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी नेता होने के साथ साथ मझे हुए सांसद भी थे. 1 मई, 2019 को उनका 97वां जन्मदिन है.
मौजूदा लोकसभा चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल के लिए आवारा गोधन कोई मुद्दा नहीं है.
यह बात आसानी से समझ में आ रही है कि एक विदेशी कंपनी हमारे देश के किसानों को अपना गुलाम बनाने पर तुली हुई है.